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mahabharat 1.40.29: कृष्ण बोले - श्रृंगी! तुम बड़े तपस्वी और प्रतापी होने का ढोंग करते हो, किन्तु तुम्हारे पिता अपने कंधे पर मरा हुआ साँप ढो रहे हैं। अब अपनी तपस्या पर कभी अभिमान मत करना।   |   mahabharat अध्याय 1.40: जरत्कारुकी तपस्या, राजा परीक्षित् का उपाख्यान तथा राजाद्वारा मुनिके कंधेपर मृतक साँप रखनेके कारण दु:खी हुए कृशका शृंगीको उत्तेजित करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 40: जरत्कारुकी तपस्या, राजा परीक्षित् का उपाख्यान तथा राजाद्वारा मुनिके कंधेपर मृतक साँप रखनेके कारण दु:खी हुए कृशका शृंगीको उत्तेजित करना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  1.40.29 
कृश उवाच
तेजस्विनस्तव पिता तथैव च तपस्विन:।
शवं स्कन्धेन वहति मा शृंगिन् गर्वितो भव॥ २९॥
 
 
अनुवाद
कृष्ण बोले - श्रृंगी! तुम बड़े तपस्वी और प्रतापी होने का ढोंग करते हो, किन्तु तुम्हारे पिता अपने कंधे पर मरा हुआ साँप ढो रहे हैं। अब अपनी तपस्या पर कभी अभिमान मत करना।
 
Krisha said - Shringi! You pretend to be a great ascetic and illustrious, but your father is carrying a dead snake on his shoulder. Now never be proud of your penance.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)