कृश उवाच
तेजस्विनस्तव पिता तथैव च तपस्विन:।
शवं स्कन्धेन वहति मा शृंगिन् गर्वितो भव॥ २९॥
अनुवाद
कृष्ण बोले - श्रृंगी! तुम बड़े तपस्वी और प्रतापी होने का ढोंग करते हो, किन्तु तुम्हारे पिता अपने कंधे पर मरा हुआ साँप ढो रहे हैं। अब अपनी तपस्या पर कभी अभिमान मत करना।
Krisha said - Shringi! You pretend to be a great ascetic and illustrious, but your father is carrying a dead snake on his shoulder. Now never be proud of your penance.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥