Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.40.27-28: उस दिन श्रृंगी अपने गुरु की आज्ञा लेकर घर लौट रहे थे। मार्ग में उन्हें अपने मित्र ऋषिकुमार कृष, जो धर्म के कारण कष्ट सहने के कारण सदैव दुर्बल रहते थे, क्रीड़ा करते हुए मिले। उन्होंने हँसते हुए श्रृंगी से अपने पिता के विषय में कुछ ऐसा कहा जिससे वे क्रोधित हो गए। हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! जब मुनिकुमार श्रृंगी क्रोधित हुए, तब वे विष के समान अत्यंत तीक्ष्ण और विनाशकारी हो गए॥27-28॥ | mahabharat अध्याय 1.40: जरत्कारुकी तपस्या, राजा परीक्षित् का उपाख्यान तथा राजाद्वारा मुनिके कंधेपर मृतक साँप रखनेके कारण दु:खी हुए कृशका शृंगीको उत्तेजित करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उस दिन श्रृंगी अपने गुरु की आज्ञा लेकर घर लौट रहे थे। मार्ग में उन्हें अपने मित्र ऋषिकुमार कृष, जो धर्म के कारण कष्ट सहने के कारण सदैव दुर्बल रहते थे, क्रीड़ा करते हुए मिले। उन्होंने हँसते हुए श्रृंगी से अपने पिता के विषय में कुछ ऐसा कहा जिससे वे क्रोधित हो गए। हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! जब मुनिकुमार श्रृंगी क्रोधित हुए, तब वे विष के समान अत्यंत तीक्ष्ण और विनाशकारी हो गए॥27-28॥
That day Shringi was returning home after taking the permission of his teacher. On the way he found his friend Rishikumar Krish, who was always weak due to suffering for the sake of religion, playing. Laughingly he told Shringi something about his father which made him furious. O best of Brahmins! When Munikumar Shringi got angry, he became very sharp and destructive like poison.॥27-28॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥