Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.40.26: वे समय-समय पर आचार्यदेव की सेवा में उपस्थित रहते थे, जो उत्तम आसन पर विराजमान रहते थे, अपने मन और इन्द्रियों को वश में रखते थे तथा समस्त प्राणियों के कल्याण के लिए सदैव तत्पर रहते थे ॥26॥ | mahabharat अध्याय 1.40: जरत्कारुकी तपस्या, राजा परीक्षित् का उपाख्यान तथा राजाद्वारा मुनिके कंधेपर मृतक साँप रखनेके कारण दु:खी हुए कृशका शृंगीको उत्तेजित करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वे समय-समय पर आचार्यदेव की सेवा में उपस्थित रहते थे, जो उत्तम आसन पर विराजमान रहते थे, अपने मन और इन्द्रियों को वश में रखते थे तथा समस्त प्राणियों के कल्याण के लिए सदैव तत्पर रहते थे ॥26॥
From time to time, he used to remain present in the service of Acharyadev, who was seated on the best seat, keeping his mind and senses under control and always ready for the welfare of all living beings. 26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥