Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.40.25: ऋषि के श्रृंगी नाम का एक पुत्र था, जो अभी छोटा था। वह महान तपस्वी, असह्य तेज से युक्त और महान व्रतों का पालन करने वाला था। वह अत्यंत क्रोधी था, इसलिए उसे प्रसन्न करना बहुत कठिन था॥ 25॥   |   mahabharat अध्याय 1.40: जरत्कारुकी तपस्या, राजा परीक्षित् का उपाख्यान तथा राजाद्वारा मुनिके कंधेपर मृतक साँप रखनेके कारण दु:खी हुए कृशका शृंगीको उत्तेजित करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 40: जरत्कारुकी तपस्या, राजा परीक्षित् का उपाख्यान तथा राजाद्वारा मुनिके कंधेपर मृतक साँप रखनेके कारण दु:खी हुए कृशका शृंगीको उत्तेजित करना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  1.40.25 
तरुणस्तस्य पुत्रोऽभूत् तिग्मतेजा महातपा:।
शृङ्गी नाम महाक्रोधो दुष्प्रसादो महाव्रत:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
ऋषि के श्रृंगी नाम का एक पुत्र था, जो अभी छोटा था। वह महान तपस्वी, असह्य तेज से युक्त और महान व्रतों का पालन करने वाला था। वह अत्यंत क्रोधी था, इसलिए उसे प्रसन्न करना बहुत कठिन था॥ 25॥
 
The sage had a son named Shringi, who was still young. He was a great ascetic, endowed with unbearable brilliance and observed great vows. He was very short-tempered; hence it was very difficult to please him.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)