Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.40.24: भरतवंश शिरोमणि नृपश्रेष्ठ परीक्षित उस धर्मात्मा साधु को उसके वास्तविक स्वरूप में नहीं जानते थे; इसीलिए उन्होंने महर्षिक का अपमान किया। 24॥   |   mahabharat अध्याय 1.40: जरत्कारुकी तपस्या, राजा परीक्षित् का उपाख्यान तथा राजाद्वारा मुनिके कंधेपर मृतक साँप रखनेके कारण दु:खी हुए कृशका शृंगीको उत्तेजित करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 40: जरत्कारुकी तपस्या, राजा परीक्षित् का उपाख्यान तथा राजाद्वारा मुनिके कंधेपर मृतक साँप रखनेके कारण दु:खी हुए कृशका शृंगीको उत्तेजित करना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  1.40.24 
न हि तं राजशार्दूलस्तथा धर्मपरायणम्।
जानाति भरतश्रेष्ठस्तत एनमधर्षयत्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
भरतवंश शिरोमणि नृपश्रेष्ठ परीक्षित उस धर्मात्मा साधु को उसके वास्तविक स्वरूप में नहीं जानते थे; इसीलिए उन्होंने महर्षिक का अपमान किया। 24॥
 
Bharatvansh Shiromani Nripashrestha Parikshit did not know that pious monk in his true form; That is why he insulted Maharshika. 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)