Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.40.23: राजा परीक्षित अपने धर्म का पालन करने में सदैव तत्पर रहते थे, इसलिए उस समय उनके द्वारा अपमानित होने पर भी क्षमाशील महामुनि ने उनका अपमान नहीं किया। | mahabharat अध्याय 1.40: जरत्कारुकी तपस्या, राजा परीक्षित् का उपाख्यान तथा राजाद्वारा मुनिके कंधेपर मृतक साँप रखनेके कारण दु:खी हुए कृशका शृंगीको उत्तेजित करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न हि तं राजशार्दूलं क्षमाशीलो महामुनि:।
स्वधर्मनिरतं भूपं समाक्षिप्तोऽप्यधर्षयत्॥ २३॥
अनुवाद
राजा परीक्षित अपने धर्म का पालन करने में सदैव तत्पर रहते थे, इसलिए उस समय उनके द्वारा अपमानित होने पर भी क्षमाशील महामुनि ने उनका अपमान नहीं किया।
Parikshit, the greatest of kings, was always prompt in observing his religious duties; therefore, even though he was insulted by him at that time, the forgiving great sage did not insult him. 23.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥