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mahabharat 1.40.21: तब राजा क्रोधित हो गए और उन्होंने अपने धनुष की नोक से एक मरा हुआ साँप उठाकर अपने कंधे पर रख लिया, परन्तु ऋषि ने उनकी बात अनसुनी कर दी।   |   mahabharat अध्याय 1.40: जरत्कारुकी तपस्या, राजा परीक्षित् का उपाख्यान तथा राजाद्वारा मुनिके कंधेपर मृतक साँप रखनेके कारण दु:खी हुए कृशका शृंगीको उत्तेजित करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 40: जरत्कारुकी तपस्या, राजा परीक्षित् का उपाख्यान तथा राजाद्वारा मुनिके कंधेपर मृतक साँप रखनेके कारण दु:खी हुए कृशका शृंगीको उत्तेजित करना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  1.40.21 
तस्य स्कन्धे मृतं सर्पं क्रुद्धो राजा समासजत्।
समुत्क्षिप्य धनुष्कोटॺा स चैनं समुपैक्षत॥ २१॥
 
 
अनुवाद
तब राजा क्रोधित हो गए और उन्होंने अपने धनुष की नोक से एक मरा हुआ साँप उठाकर अपने कंधे पर रख लिया, परन्तु ऋषि ने उनकी बात अनसुनी कर दी।
 
Then the king became angry and picked up a dead snake from the tip of his bow and placed it on his shoulder, but the sage ignored him. 21.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)