Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.40.13: एक दिन उन्होंने अपना धनुष लेकर घने वन में एक भयंकर पशु को टेढ़े सिरे वाले बाण से घायल कर दिया और जब वह भाग गया तो उन्होंने बहुत दूर तक उसका पीछा किया॥13॥   |   mahabharat अध्याय 1.40: जरत्कारुकी तपस्या, राजा परीक्षित् का उपाख्यान तथा राजाद्वारा मुनिके कंधेपर मृतक साँप रखनेके कारण दु:खी हुए कृशका शृंगीको उत्तेजित करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 40: जरत्कारुकी तपस्या, राजा परीक्षित् का उपाख्यान तथा राजाद्वारा मुनिके कंधेपर मृतक साँप रखनेके कारण दु:खी हुए कृशका शृंगीको उत्तेजित करना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.40.13 
स कदाचिन्मृगं विद्‍ध्वा बाणेनानतपर्वणा।
पृष्ठतो धनुरादाय ससार गहने वने॥ १३॥
 
 
अनुवाद
एक दिन उन्होंने अपना धनुष लेकर घने वन में एक भयंकर पशु को टेढ़े सिरे वाले बाण से घायल कर दिया और जब वह भाग गया तो उन्होंने बहुत दूर तक उसका पीछा किया॥13॥
 
One day, taking up his bow, he pierced a ferocious animal with an arrow having a bent tip in a dense forest and when it ran away, he chased it for a long distance.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)