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mahabharat 1.40.12: महाराज परीक्षित वन में वराह, तार्क्षु (विशेष व्याघ्र), महिष तथा नाना प्रकार के हिंसक वनपशुओं का शिकार करते हुए विचरण करते थे। 12॥   |   mahabharat अध्याय 1.40: जरत्कारुकी तपस्या, राजा परीक्षित् का उपाख्यान तथा राजाद्वारा मुनिके कंधेपर मृतक साँप रखनेके कारण दु:खी हुए कृशका शृंगीको उत्तेजित करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 40: जरत्कारुकी तपस्या, राजा परीक्षित् का उपाख्यान तथा राजाद्वारा मुनिके कंधेपर मृतक साँप रखनेके कारण दु:खी हुए कृशका शृंगीको उत्तेजित करना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  1.40.12 
मृगान् विध्यन् वराहांश्च तरक्षून् महिषांस्तथा।
अन्यांश्च विविधान् वन्यांश्चचार पृथिवीपति:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
महाराज परीक्षित वन में वराह, तार्क्षु (विशेष व्याघ्र), महिष तथा नाना प्रकार के हिंसक वनपशुओं का शिकार करते हुए विचरण करते थे। 12॥
 
Maharaja Parikshit used to roam in the forest hunting Varaha, Tarkshu (special tiger), Mahisha and various other types of violent forest animals. 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)