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mahabharat 1.39.9: समय आने पर इस नागराज को स्वयं वैसा ही करना चाहिए। जनमेजय के यज्ञ में केवल पापी सर्प ही नष्ट होंगे, धर्मात्मा सर्प नहीं। 9॥   |   mahabharat अध्याय 1.39: ब्रह्माजीकी आज्ञासे वासुकिका जरत्कारु मुनिके साथ अपनी बहिनको ब्याहनेके लिये प्रयत्नशील होना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 39: ब्रह्माजीकी आज्ञासे वासुकिका जरत्कारु मुनिके साथ अपनी बहिनको ब्याहनेके लिये प्रयत्नशील होना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  1.39.9 
तत् करोत्वेष नागेन्द्र: प्रा प् तकालं वच: स्वयम्।
विनशिष्यन्ति ये पापा न तु ये धर्मचारिण:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
समय आने पर इस नागराज को स्वयं वैसा ही करना चाहिए। जनमेजय के यज्ञ में केवल पापी सर्प ही नष्ट होंगे, धर्मात्मा सर्प नहीं। 9॥
 
This Nagraj himself should act accordingly when the time comes. Only the sinful snakes will be destroyed in the Yajna of Janmejaya, but not the righteous ones. 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)