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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 39: ब्रह्माजीकी आज्ञासे वासुकिका जरत्कारु मुनिके साथ अपनी बहिनको ब्याहनेके लिये प्रयत्नशील होना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.39.8 
ब्रह्मोवाच
मयैव तद् वितीर्णं वै वचनं मनसामरा:।
एलापत्रेण नागेन यदस्याभिहितं पुरा॥ ८॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्माजी बोले, 'हे देवताओं! एलापत्र नाग ने पहले जो कुछ वासुकि से कहा था, वह सब मैंने अपने मन के संकल्प से उसे दे दिया था (मेरी प्रेरणा से एलापत्र ने वे बातें वासुकि आदि नागों से कही थीं)।
 
Brahma said, 'O Gods! Whatever Elapatra serpent had said to Vasuki earlier, I had given it to him through my mental resolve (with my inspiration Elapatra had said those things to Vasuki and other serpents).
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)