Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.39.6: हे प्रभु! अपने भाई-बंधुओं का हित चाहने वाले इस सर्पराज के हृदय में माता का शाप काँटे के समान चुभ गया है और उसे पीड़ा पहुँचा रहा है। कृपया उस काँटे को दूर कीजिए॥6॥ | mahabharat अध्याय 1.39: ब्रह्माजीकी आज्ञासे वासुकिका जरत्कारु मुनिके साथ अपनी बहिनको ब्याहनेके लिये प्रयत्नशील होना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अस्यैतन्मानसं शल्यं समुद्धर्तुं त्वमर्हसि।
जनन्या: शापजं देव ज्ञातीनां हितमिच्छत:॥ ६॥
अनुवाद
हे प्रभु! अपने भाई-बंधुओं का हित चाहने वाले इस सर्पराज के हृदय में माता का शाप काँटे के समान चुभ गया है और उसे पीड़ा पहुँचा रहा है। कृपया उस काँटे को दूर कीजिए॥6॥
'O Lord! The curse of the mother has become like a thorn in the heart of this king of snakes who wants the welfare of his brothers and relatives and is causing pain. Please remove that thorn from him.॥ 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥