Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.39.3-5: कुछ समय व्यतीत होने पर समस्त देवताओं और दैत्यों ने मिलकर समुद्र मंथन किया। उसमें बलवानों में श्रेष्ठ वासुकि नाग को मन्दराचल रूपी मथानी में लपेटने के लिए रस्सी बनाया गया। समुद्र मंथन का कार्य पूर्ण करके भगवान वासुकि नाग सहित पितामह ब्रह्मा के पास गए और उनसे बोले - 'प्रभो! वे वासुकि माता के शाप से भयभीत हैं और अत्यन्त व्यथित रहते हैं।' 3-5॥ | mahabharat अध्याय 1.39: ब्रह्माजीकी आज्ञासे वासुकिका जरत्कारु मुनिके साथ अपनी बहिनको ब्याहनेके लिये प्रयत्नशील होना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कुछ समय व्यतीत होने पर समस्त देवताओं और दैत्यों ने मिलकर समुद्र मंथन किया। उसमें बलवानों में श्रेष्ठ वासुकि नाग को मन्दराचल रूपी मथानी में लपेटने के लिए रस्सी बनाया गया। समुद्र मंथन का कार्य पूर्ण करके भगवान वासुकि नाग सहित पितामह ब्रह्मा के पास गए और उनसे बोले - 'प्रभो! वे वासुकि माता के शाप से भयभीत हैं और अत्यन्त व्यथित रहते हैं।' 3-5॥
After a short time passed, all the gods and demons churned the ocean. In it, Vasuki Naga, the best among the strong, was made a rope to be wrapped in the churner in the form of Mandrachal. After completing the task of churning the ocean, God Vasuki along with the serpent went to Grandfather Brahma and said to him – 'Lord! They are afraid of the curse of Vasuki Mata and remain very distressed. 3-5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥