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mahabharat 1.39.12-13: उग्रश्रवाजी कहते हैं - ब्रह्माजी के वचन सुनकर शाप से पीड़ित हुए नागराज वासुकि ने समस्त नागों को यह संदेश भेजा कि मैं अपनी बहन का विवाह जरत्कारु ऋषि के साथ करना चाहता हूँ। तब उन्होंने बहुत से नागों को, जो सदैव उनकी आज्ञा में रहते थे, जरत्कारु ऋषि की खोज करने के लिए नियुक्त किया॥12-13॥   |   mahabharat अध्याय 1.39: ब्रह्माजीकी आज्ञासे वासुकिका जरत्कारु मुनिके साथ अपनी बहिनको ब्याहनेके लिये प्रयत्नशील होना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 39: ब्रह्माजीकी आज्ञासे वासुकिका जरत्कारु मुनिके साथ अपनी बहिनको ब्याहनेके लिये प्रयत्नशील होना  »  श्लोक 12-13
 
 
श्लोक  1.39.12-13 
सौतिरुवाच
एतच्छ्रुत्वा तु नागेन्द्र: पितामहवचस्तदा।
संदिश्य पन्नगान् सर्वान् वासुकि: शापमोहित:॥ १२॥
स्वसारमुद्यम्य तदा जरत्कारुमृषिं प्रति।
सर्पान् बहूञ्जरत्कारौ नित्ययुक्तान् समादधत्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
उग्रश्रवाजी कहते हैं - ब्रह्माजी के वचन सुनकर शाप से पीड़ित हुए नागराज वासुकि ने समस्त नागों को यह संदेश भेजा कि मैं अपनी बहन का विवाह जरत्कारु ऋषि के साथ करना चाहता हूँ। तब उन्होंने बहुत से नागों को, जो सदैव उनकी आज्ञा में रहते थे, जरत्कारु ऋषि की खोज करने के लिए नियुक्त किया॥12-13॥
 
Ugrashravaji says - After listening to Brahmaji's words, the serpent king Vasuki, who was afflicted by the curse, sent this message to all the snakes that he wanted to marry his sister to the sage Jaratkaru. Then he appointed many serpents who were always under his command to search for the sage Jaratkaru.॥ 12-13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)