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mahabharat 1.39.11: हे देवताओं! एलापत्र नाग ने जो कुछ कहा है, वह सर्पों के लिए हितकर है। वही होने वाला है। उसके विपरीत कुछ भी नहीं हो सकता। ॥11॥   |   mahabharat अध्याय 1.39: ब्रह्माजीकी आज्ञासे वासुकिका जरत्कारु मुनिके साथ अपनी बहिनको ब्याहनेके लिये प्रयत्नशील होना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 39: ब्रह्माजीकी आज्ञासे वासुकिका जरत्कारु मुनिके साथ अपनी बहिनको ब्याहनेके लिये प्रयत्नशील होना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  1.39.11 
एलापत्रेण यत् प्रोक्तं वचनं भुजगेन ह।
पन्नगानां हितं देवास्तत् तथा न तदन्यथा॥ ११॥
 
 
अनुवाद
हे देवताओं! एलापत्र नाग ने जो कुछ कहा है, वह सर्पों के लिए हितकर है। वही होने वाला है। उसके विपरीत कुछ भी नहीं हो सकता। ॥11॥
 
O Gods! Whatever Elapatra Naag has said is beneficial for snakes. That is what is going to happen. Nothing contrary to that can happen. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)