Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.39.1-2: उग्रश्रवाजी कहते हैं- हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! एलापत्र के वचन सुनकर नागों के मन प्रसन्न हो गए। सबने एक साथ कहा- 'ठीक है, ठीक है।' यह सुनकर वासुकि भी बहुत प्रसन्न हुए। उस दिन से वे अपनी बहन जरत्कारुका का बड़े प्रेम से पालन-पोषण करने लगे। 1-2. | mahabharat अध्याय 1.39: ब्रह्माजीकी आज्ञासे वासुकिका जरत्कारु मुनिके साथ अपनी बहिनको ब्याहनेके लिये प्रयत्नशील होना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उग्रश्रवाजी कहते हैं- हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! एलापत्र के वचन सुनकर नागों के मन प्रसन्न हो गए। सबने एक साथ कहा- 'ठीक है, ठीक है।' यह सुनकर वासुकि भी बहुत प्रसन्न हुए। उस दिन से वे अपनी बहन जरत्कारुका का बड़े प्रेम से पालन-पोषण करने लगे। 1-2.
Ugrasravaji says- O best of Brahmins! On hearing the words of Elapatra, the minds of the snakes became happy. All of them said together- 'All right, all right.' Vasuki also felt very happy on hearing this. From that day onwards, he started taking care of his sister Jaratkaruka with great love. 1-2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥