Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.38.9: ब्रह्माजी बोले, "इन दिनों भयानक रूप और घातक विष वाले बहुत से क्रूर सर्प (लोगों को कष्ट दे रहे हैं) हैं। मैंने उस समय केवल लोक-कल्याण की इच्छा से ही कद्रू को नहीं रोका था॥9॥ | mahabharat अध्याय 1.38: वासुकिकी बहिन जरत्कारुका जरत्कारु मुनिके साथ विवाह करनेका निश्चय । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ब्रह्मोवाच
बहव: पन्नगास्तीक्ष्णा घोररूपा विषोल्बणा:।
प्रजानां हितकामोऽहं न च वारितवांस्तदा॥ ९॥
अनुवाद
ब्रह्माजी बोले, "इन दिनों भयानक रूप और घातक विष वाले बहुत से क्रूर सर्प (लोगों को कष्ट दे रहे हैं) हैं। मैंने उस समय केवल लोक-कल्याण की इच्छा से ही कद्रू को नहीं रोका था॥9॥
Brahma said, "These days there are many cruel serpents with terrible appearance and deadly poison (who are troubling the people). I did not stop Kadru at that time only because of the desire for the welfare of the people.॥ 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥