Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.38.4-6: 'हे सर्पश्रेष्ठ! हम पर जो यह भय आया है, वह भी दैवीय कारण से है, अतः हमें परमात्मा की शरण लेनी चाहिए। हे सर्पश्रेष्ठ! इस विषय में आप सब मेरी बात सुनिए। जब माता ने सर्पों को शाप दिया था, तब मैं भयभीत होकर उनकी गोद में चढ़ गया था। हे पराक्रमी सर्पराजो! उसी समय ब्रह्माजी के पास अत्यन्त दुःखी होकर आए हुए देवताओं की वाणी मेरे कानों में पड़ी - 'अहा! स्त्रियाँ बड़ी कठोर होती हैं, बड़ी कठोर होती हैं।' | mahabharat अध्याय 1.38: वासुकिकी बहिन जरत्कारुका जरत्कारु मुनिके साथ विवाह करनेका निश्चय । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'हे सर्पश्रेष्ठ! हम पर जो यह भय आया है, वह भी दैवीय कारण से है, अतः हमें परमात्मा की शरण लेनी चाहिए। हे सर्पश्रेष्ठ! इस विषय में आप सब मेरी बात सुनिए। जब माता ने सर्पों को शाप दिया था, तब मैं भयभीत होकर उनकी गोद में चढ़ गया था। हे पराक्रमी सर्पराजो! उसी समय ब्रह्माजी के पास अत्यन्त दुःखी होकर आए हुए देवताओं की वाणी मेरे कानों में पड़ी - 'अहा! स्त्रियाँ बड़ी कठोर होती हैं, बड़ी कठोर होती हैं।'
'O best of the serpents! This fear that has fallen on us is also divinely caused, therefore we must seek the shelter of the divine. O best of the serpents! All of you listen to me in this matter. When the mother had cursed the serpents, I had climbed into her lap out of fear. O mighty serpent kings! Just then, the voices of the gods who had come to Brahmaji in great grief reached my ears - 'Oh! Women are very harsh, very harsh.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥