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mahabharat 1.38.13: उसके यहाँ आस्तिक नामक एक महान तपस्वी पुत्र उत्पन्न होगा, जो उस यज्ञ को रोक देगा, अतः धर्मात्मा सर्प उसमें जलने से बच जाएँगे॥13॥   |   mahabharat अध्याय 1.38: वासुकिकी बहिन जरत्कारुका जरत्कारु मुनिके साथ विवाह करनेका निश्चय   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 38: वासुकिकी बहिन जरत्कारुका जरत्कारु मुनिके साथ विवाह करनेका निश्चय  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.38.13 
तस्य पुत्रो जरत्कारोर्भविष्यति तपोधन:।
आस्तीको नाम यज्ञं स प्रतिषेत्स्यति तं तदा।
तत्र मोक्ष्यन्ति भुजगा ये भविष्यन्ति धार्मिका:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
उसके यहाँ आस्तिक नामक एक महान तपस्वी पुत्र उत्पन्न होगा, जो उस यज्ञ को रोक देगा, अतः धर्मात्मा सर्प उसमें जलने से बच जाएँगे॥13॥
 
A great ascetic son named Aastik will be born to him who will stop that yajna. Therefore, the snakes who are religious will be saved from being burnt in it.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)