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श्री महाभारत
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पर्व 1: आदि पर्व
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अध्याय 37: माताके शापसे बचनेके लिये वासुकि आदि नागोंका परस्पर परामर्श
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श्लोक 5
श्लोक
1.37.5
अव्ययस्याप्रमेयस्य सत्यस्य च तथाग्रत:।
शप्ता इत्येव मे श्रुत्वा जायते हृदि वेपथु:॥ ५॥
अनुवाद
माता ने अविनाशी, अथाह और सत्यस्वरूप भगवान ब्रह्मा के सामने हमें शाप दिया है - यह सुनकर ही हमारे हृदय में सिहरन उत्पन्न हो जाती है ॥5॥
Mother has cursed us in front of Lord Brahma who is indestructible, immeasurable and true – just hearing this creates a shiver in our hearts. 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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