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mahabharat 1.37.33: 'भुजंगमो! मैं अपने जाति-बंधुओं और अपने हित को ध्यान में रखते हुए आपके उपदेश के अनुसार कुछ भी कैसे करूँ, यह मेरी समझ में नहीं आता। ॥33॥   |   mahabharat अध्याय 1.37: माताके शापसे बचनेके लिये वासुकि आदि नागोंका परस्पर परामर्श   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 37: माताके शापसे बचनेके लिये वासुकि आदि नागोंका परस्पर परामर्श  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  1.37.33 
ज्ञातिवर्गस्य सौहार्दादात्मनश्च भुजङ्गमा:।
न च जानाति मे बुद्धि: किंचित् कर्तुं वचो हि व:॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
'भुजंगमो! मैं अपने जाति-बंधुओं और अपने हित को ध्यान में रखते हुए आपके उपदेश के अनुसार कुछ भी कैसे करूँ, यह मेरी समझ में नहीं आता। ॥33॥
 
' Bhujangamo! I do not understand how to do anything as per your advice keeping in mind the interests of my caste brothers and myself. ॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)