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श्री महाभारत
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पर्व 1: आदि पर्व
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अध्याय 37: माताके शापसे बचनेके लिये वासुकि आदि नागोंका परस्पर परामर्श
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श्लोक 32
श्लोक
1.37.32
किं तत्र संविधातव्यं भवतां स्याद्धितं तु यत् ।
श्रेय:प्रसाधनं मन्ये कश्यपस्य महात्मन:॥ ३२॥
अनुवाद
'ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए, जिससे तुम्हारा कल्याण हो? मैं महात्मा काश्यपजी को प्रसन्न करने में ही अपना कल्याण समझता हूँ।' 32.
'What should be done in such a situation, which would be beneficial for you. I feel my welfare lies in pleasing Mahatma Kashyapji. 32.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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