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mahabharat 1.37.30: ऐसा कहकर वे सर्प सर्पराज वासुकि की ओर देखने लगे। तब वासुकि ने बहुत विचार करके उन सर्पों से कहा-॥30॥   |   mahabharat अध्याय 1.37: माताके शापसे बचनेके लिये वासुकि आदि नागोंका परस्पर परामर्श   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 37: माताके शापसे बचनेके लिये वासुकि आदि नागोंका परस्पर परामर्श  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  1.37.30 
इत्युक्त्वा समुदैक्षन्त वासुकिं पन्नगोत्तमम्।
वासुकिश्चापि संचिन्त्य तानुवाच भुजङ्गमान्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर वे सर्प सर्पराज वासुकि की ओर देखने लगे। तब वासुकि ने बहुत विचार करके उन सर्पों से कहा-॥30॥
 
Saying this, the snakes started looking at the King of Snakes Vasuki. Then Vasuki, after much thought, said to those snakes -॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)