Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.37.3-4: वासुकि बोले - हे निष्पाप सर्पो! माता ने जिस प्रकार हमें शाप दिया है, वह तुम लोग भली-भाँति जानते हो। उस शाप से मुक्ति पाने के लिए क्या किया जा सकता है? हम सब को इस विषय में विचार-विमर्श करना चाहिए और इसके लिए प्रयत्न करना चाहिए। सभी शापों से मुक्ति संभव है, किन्तु जो माता के शाप से पीड़ित हैं, उनकी मुक्ति का कोई उपाय नहीं है ॥3-4॥ | mahabharat अध्याय 1.37: माताके शापसे बचनेके लिये वासुकि आदि नागोंका परस्पर परामर्श । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वासुकि बोले - हे निष्पाप सर्पो! माता ने जिस प्रकार हमें शाप दिया है, वह तुम लोग भली-भाँति जानते हो। उस शाप से मुक्ति पाने के लिए क्या किया जा सकता है? हम सब को इस विषय में विचार-विमर्श करना चाहिए और इसके लिए प्रयत्न करना चाहिए। सभी शापों से मुक्ति संभव है, किन्तु जो माता के शाप से पीड़ित हैं, उनकी मुक्ति का कोई उपाय नहीं है ॥3-4॥
Vasuki said - O sinless serpents! The way in which mother has cursed us is well known to you. What can be done to get rid of that curse? We all should discuss about it and try for it. It is possible to get rid of all curses, but there is no way to get rid of those who are suffering from mother's curse. ॥ 3-4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥