श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 37: माताके शापसे बचनेके लिये वासुकि आदि नागोंका परस्पर परामर्श  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  1.37.29 
एषा नो नैष्ठिकी बुद्धि: सर्वेषामीक्षणश्रव:।
अथ यन्मन्यसे राजन् द्रुतं तत् संविधीयताम्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
'हे आँखों से सुनने वाले सर्पराज! हम सब इस निष्कर्ष पर पहुँचे हैं। अब जो भी उचित समझो, शीघ्र करो।'
 
'O King of Snakes who can hear with his eyes! All of us have come to this conclusion. Now whatever you think is right, do it quickly.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)