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mahabharat 1.37.26-27h: तब दूसरे सर्पों ने कहा, 'जब राजा जनमेजय जल में क्रीड़ा कर रहे हों, तो हमें उन्हें वहाँ से खींचकर अपने घर ले आना चाहिए और बाँध देना चाहिए। यदि हम ऐसा करेंगे, तो यज्ञ नहीं हो पाएगा।'   |   mahabharat अध्याय 1.37: माताके शापसे बचनेके लिये वासुकि आदि नागोंका परस्पर परामर्श   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 37: माताके शापसे बचनेके लिये वासुकि आदि नागोंका परस्पर परामर्श  »  श्लोक 26-27h
 
 
श्लोक  1.37.26-27h 
अपरे त्वब्रुवंस्तत्र जले प्रक्रीडितं नृपम्॥ २६॥
गृहमानीय बध्नीम: क्रतुरेवं भवेन्न स:।
 
 
अनुवाद
तब दूसरे सर्पों ने कहा, 'जब राजा जनमेजय जल में क्रीड़ा कर रहे हों, तो हमें उन्हें वहाँ से खींचकर अपने घर ले आना चाहिए और बाँध देना चाहिए। यदि हम ऐसा करेंगे, तो यज्ञ नहीं हो पाएगा।'
 
Then the other snakes said, 'When King Janamejaya is playing in the water, we should pull him from there and bring him to our house and tie him up. If we do this, the yagya will not take place.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)