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mahabharat 1.37.25-26h: इसके बाद अन्य सर्पों ने कहा, "हम उस यज्ञ में पुरोहित बनेंगे और यज्ञ में विघ्न डालेंगे कि 'हम जो दक्षिणा माँगें, हमें दे दीजिए।' उस समय राजा हमारे अधीन हो जाएगा और हमारी इच्छानुसार कार्य करेगा।" ॥25 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 1.37: माताके शापसे बचनेके लिये वासुकि आदि नागोंका परस्पर परामर्श   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 37: माताके शापसे बचनेके लिये वासुकि आदि नागोंका परस्पर परामर्श  »  श्लोक 25-26h
 
 
श्लोक  1.37.25-26h 
अपरे त्वब्रुवंस्तत्र ऋत्विजोऽस्य भवामहे।
यज्ञविघ्नं करिष्यामो दीयतां दक्षिणा इति॥ २५॥
वश्यतां च गतोऽसौ न: करिष्यति यथेप्सितम्।
 
 
अनुवाद
इसके बाद अन्य सर्पों ने कहा, "हम उस यज्ञ में पुरोहित बनेंगे और यज्ञ में विघ्न डालेंगे कि 'हम जो दक्षिणा माँगें, हमें दे दीजिए।' उस समय राजा हमारे अधीन हो जाएगा और हमारी इच्छानुसार कार्य करेगा।" ॥25 1/2॥
 
After this the other snakes said, "We will become priests in that yagya and will create obstacles in the yagya by saying, 'Give us whatever dakshina we demand.' At that time the king will come under our control and will do as we wish." ॥25 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)