अथवा संस्कृतं भोज्यं दूषयन्तु भुजङ्गमा:।
स्वेन मूत्रपुरीषेण सर्वभोज्यविनाशिना॥ २४॥
अनुवाद
‘अथवा सर्प, जो सब प्रकार के अन्न का नाश करने वाले हैं, वे यज्ञ में पकाए गए अन्न को अपने मल-मूत्र से दूषित कर दें।’॥24॥
‘Or the serpents, who are destroyers of all kinds of food, may contaminate the food items prepared in the sacrifice with their excreta and urine.’॥ 24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥