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mahabharat 1.37.22: दूसरा महासर्प रात्रि में वहाँ जाकर प्रमादपूर्वक सोये हुए ऋत्विजों के स्रुक, स्रुव और यज्ञपात्र आदि को शीघ्रतापूर्वक चुरा ले। इस प्रकार वह विघ्नग्रस्त हो जाएगा ॥22॥   |   mahabharat अध्याय 1.37: माताके शापसे बचनेके लिये वासुकि आदि नागोंका परस्पर परामर्श   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 37: माताके शापसे बचनेके लिये वासुकि आदि नागोंका परस्पर परामर्श  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  1.37.22 
स्रुग्भाण्डं निशि गत्वा च अपरे भुजगोत्तमा:।
प्रमत्तानां हरन्त्वाशु विघ्न एवं भविष्यति॥ २२॥
 
 
अनुवाद
दूसरा महासर्प रात्रि में वहाँ जाकर प्रमादपूर्वक सोये हुए ऋत्विजों के स्रुक, स्रुव और यज्ञपात्र आदि को शीघ्रतापूर्वक चुरा ले। इस प्रकार वह विघ्नग्रस्त हो जाएगा ॥22॥
 
‘The second great snake should go there at night and quickly steal the Sruk, Sruva and sacrificial utensils etc. of the Ritvijas who were sleeping carelessly. In this way it will be disrupted. 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)