श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 37: माताके शापसे बचनेके लिये वासुकि आदि नागोंका परस्पर परामर्श  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  1.37.21 
अपरे त्वब्रुवन् नागा: समिद्धं जातवेदसम्।
वर्षैर्निर्वापयिष्यामो मेघा भूत्वा सविद्युत:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
इस पर अन्य सर्पों ने कहा, 'जब सर्प यज्ञ के लिए अग्नि जलाई जाएगी, तब हम बिजली वाले बादल बन जाएंगे और पानी बरसाकर उसे बुझा देंगे।
 
At this the other serpents said, 'When the fire is lit for the serpent sacrifice, we will turn into clouds with lightning and extinguish it by raining water.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)