Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.37.19: यह सुनकर अन्य धर्मपरायण और दयालु सर्पों ने कहा - 'ऐसा सोचना तुम्हारा मूर्खता है। ब्राह्मण का वध कभी शुभ नहीं हो सकता।॥19॥   |   mahabharat अध्याय 1.37: माताके शापसे बचनेके लिये वासुकि आदि नागोंका परस्पर परामर्श   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 37: माताके शापसे बचनेके लिये वासुकि आदि नागोंका परस्पर परामर्श  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  1.37.19 
अपरे त्वब्रुवन् नागा धर्मात्मानो दयालव:।
अबुद्धिरेषा भवतां ब्रह्महत्या न शोभनम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर अन्य धर्मपरायण और दयालु सर्पों ने कहा - 'ऐसा सोचना तुम्हारा मूर्खता है। ब्राह्मण का वध कभी शुभ नहीं हो सकता।॥19॥
 
Hearing this, the other pious and kind serpents said, 'It is foolish of you to think like this. Killing a brahmin can never be auspicious.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)