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mahabharat 1.37.18: 'आचार्य के अतिरिक्त जो ब्राह्मण सर्पयज्ञ की विधि जानते हैं और जनमेजय के यज्ञ में पुरोहित बनने वाले हैं, उन सब को हम डस लेंगे। इस प्रकार सारा कार्य सिद्ध हो जाएगा।'॥18॥   |   mahabharat अध्याय 1.37: माताके शापसे बचनेके लिये वासुकि आदि नागोंका परस्पर परामर्श   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 37: माताके शापसे बचनेके लिये वासुकि आदि नागोंका परस्पर परामर्श  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  1.37.18 
ये चान्ये सर्पसत्रज्ञा भविष्यन्त्यस्य चर्त्विज:।
तांश्च सर्वान् दशिष्याम: कृतमेवं भविष्यति॥ १८॥
 
 
अनुवाद
'आचार्य के अतिरिक्त जो ब्राह्मण सर्पयज्ञ की विधि जानते हैं और जनमेजय के यज्ञ में पुरोहित बनने वाले हैं, उन सब को हम डस लेंगे। इस प्रकार सारा कार्य सिद्ध हो जाएगा।'॥18॥
 
'We will bite all the Brahmins who apart from the Acharya know the process of performing the snake sacrifice and are going to be priests in the sacrifice of Janamejaya. This way the whole task will be accomplished.'॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)