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mahabharat 1.37.15: हम तर्क और बुद्धि से यह सिद्ध करेंगे कि वह यज्ञ इस लोक और परलोक में अनेक भयंकर दोष उत्पन्न करेगा; अतः वह यज्ञ कभी नहीं किया जाएगा॥15॥   |   mahabharat अध्याय 1.37: माताके शापसे बचनेके लिये वासुकि आदि नागोंका परस्पर परामर्श   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 37: माताके शापसे बचनेके लिये वासुकि आदि नागोंका परस्पर परामर्श  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.37.15 
दर्शयन्तो बहून् दोषान् प्रेत्य चेह च दारुणान्।
हेतुभि: कारणैश्चैव यथा यज्ञो भवेन्न स:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
हम तर्क और बुद्धि से यह सिद्ध करेंगे कि वह यज्ञ इस लोक और परलोक में अनेक भयंकर दोष उत्पन्न करेगा; अतः वह यज्ञ कभी नहीं किया जाएगा॥15॥
 
‘We shall show by logic and reason that that yajna will bring about many terrible defects in this world and the next; hence that yajna will not be performed at all.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)