Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.37.14: हम वहाँ बड़े विश्वास और आदर के साथ रहेंगे। अतः महाज्ञानी राजा जनमेजय यज्ञ के विषय में हमारी राय अवश्य पूछेंगे। उस समय हम स्पष्ट कह देंगे कि - 'यज्ञ मत करो।'॥14॥ | mahabharat अध्याय 1.37: माताके शापसे बचनेके लिये वासुकि आदि नागोंका परस्पर परामर्श । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स नो बहुमतान् राजा बुद्धॺा बुद्धिमतां वर:।
यज्ञार्थं प्रक्ष्यति व्यक्तं नेति वक्ष्यामहे वयम्॥ १४॥
अनुवाद
हम वहाँ बड़े विश्वास और आदर के साथ रहेंगे। अतः महाज्ञानी राजा जनमेजय यज्ञ के विषय में हमारी राय अवश्य पूछेंगे। उस समय हम स्पष्ट कह देंगे कि - 'यज्ञ मत करो।'॥14॥
‘We will stay there with great trust and respect. Therefore, the wisest king Janamejaya will definitely ask our opinion regarding the yajna. At that time, we will clearly say – ‘Don’t perform the yajna’.॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥