श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 37: माताके शापसे बचनेके लिये वासुकि आदि नागोंका परस्पर परामर्श  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  1.37.10 
सौतिरुवाच
तथेत्युक्त्वा तत: सर्वे काद्रवेया: समागता:।
समयं चक्रिरे तत्र मन्त्रबुद्धिविशारदा:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
उग्रश्रवाजी कहते हैं - शौनक! वहाँ एकत्रित हुए कद्रू के सभी पुत्र 'बहुत अच्छा' कहकर किसी निष्कर्ष पर पहुँचे, क्योंकि वे नीति का निर्णय करने में निपुण थे॥10॥
 
Ugrasravaji says - Shaunak! All the sons of Kadru gathered there reached a conclusion saying 'very good', because they were adept in deciding the policy.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)