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mahabharat 1.36.8: शेषनाग बोले - हे प्रभु! मेरे सभी भाई अत्यन्त मंदबुद्धि हैं, अतः मैं उनके साथ नहीं रहना चाहता। कृपया मेरी इस इच्छा को स्वीकार करें॥8॥   |   mahabharat अध्याय 1.36: शेषनागकी तपस्या, ब्रह्माजीसे वर-प्राप्ति तथा पृथ्वीको सिरपर धारण करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 36: शेषनागकी तपस्या, ब्रह्माजीसे वर-प्राप्ति तथा पृथ्वीको सिरपर धारण करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.36.8 
शेष उवाच
सोदर्या मम सर्वे हि भ्रातरो मन्दचेतस:।
सह तैर्नोत्सहे वस्तुं तद् भवाननुमन्यताम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
शेषनाग बोले - हे प्रभु! मेरे सभी भाई अत्यन्त मंदबुद्धि हैं, अतः मैं उनके साथ नहीं रहना चाहता। कृपया मेरी इस इच्छा को स्वीकार करें॥8॥
 
Sheshnag said - O Lord! All my brothers are very dull-witted, therefore I do not wish to live with them. Please approve this wish of mine. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)