श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 36: शेषनागकी तपस्या, ब्रह्माजीसे वर-प्राप्ति तथा पृथ्वीको सिरपर धारण करना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  1.36.19 
इमां महीं शैलवनोपपन्नां
ससागरग्रामविहारपत्तनाम्।
त्वं शेष सम्यक् चलितां यथावत्
संगृह्य तिष्ठस्व यथाचला स्यात्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
हे शेषनाग! पर्वत, वन, समुद्र, ग्राम, मठ और नगरों सहित यह सम्पूर्ण पृथ्वी हिलती रहती है। आप इसे भलीभाँति धारण करें और इस प्रकार स्थित रहें कि यह सर्वथा स्थिर हो जाए॥19॥
 
O Sheshnag! This entire earth including its mountains, forests, seas, villages, monasteries and cities keeps shaking. You hold it well and stay in such a way that it becomes absolutely still.॥19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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