ब्रह्मोवाच
प्रीतोऽस्म्यनेन ते शेष दमेन च शमेन च।
त्वया त्विदं वच: कार्यं मन्नियोगात् प्रजाहितम्॥ १८॥
अनुवाद
ब्रह्माजी ने कहा- शेष! मैं तुम्हारे संयम और मन के संयम से अत्यन्त प्रसन्न हूँ। अब मेरी अनुमति से तुम लोक-कल्याण के लिए यह कार्य करो, जो मैं तुम्हें बता रहा हूँ॥ 18॥
Brahmaji said- Sesha! I am very pleased with your self-control and mind-control. Now, with my permission, you should do this work, which I am telling you, for the welfare of the people.॥ 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥