श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 36: शेषनागकी तपस्या, ब्रह्माजीसे वर-प्राप्ति तथा पृथ्वीको सिरपर धारण करना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  1.36.14 
मातुश्चाप्यपराधाद् वै भ्रातॄणां ते महद् भयम्।
कृतोऽत्र परिहारश्च पूर्वमेव भुजङ्गम॥ १४॥
 
 
अनुवाद
'अपनी माता को अपमानित करने के कारण तुम्हारे सभी भाई निश्चय ही महान संकट में पड़ गए हैं; परंतु हे भुजंगम! इस विषय में जो उपाय आवश्यक है, उसकी व्यवस्था मैंने पहले ही कर दी है॥ 14॥
 
'Due to offending their mother, all your brothers have surely been in great danger; but O Bhujangam! I have already made arrangements for the remedy that is required in this matter.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)