श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 36: शेषनागकी तपस्या, ब्रह्माजीसे वर-प्राप्ति तथा पृथ्वीको सिरपर धारण करना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  1.36.11 
तं च द्विषन्ति सततं स चापि बलवत्तर:।
वरप्रदानात् स पितु: कश्यपस्य महात्मन:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
परंतु वे सर्प उनसे भी सदैव द्वेष रखते हैं। मेरे पिता महात्मा कश्यप के आशीर्वाद से गरुड़ भी अत्यंत शक्तिशाली हैं।॥11॥
 
But those serpents always hate them too. Garuda is also very powerful due to the blessings of my father Mahatma Kashyap. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)