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mahabharat 1.35.5-16: शेषजी सबसे पहले नागों में प्रकट हुए। इसके बाद वासुकी, ऐरावत, तक्षक, कर्कोटक, धनंजय, कालिय, मणिनाग, अपूरण, पिंजरक, एलापत्र, वामन, नील, अनिल, कल्माष, शबल, आर्यक, उग्रक, कलशपोतक, सुमनाख्य, दधिमुख, विमलपिंडक, आप्टा, कर्कोटक (द्वितीय), शंख, वालिशिख, निष्ठानक, हेमगुह, नहुष, पिंगल, बाह्यकर्ण। हस्तिपाद, मुद्गर्पिण्डक, कम्बल, अश्वतर, कालियाक, वृत्त, संवर्तक, पद्म (प्रथम), पद्म (द्वितीय), शंखमुख, कुष्माण्डक, क्षेमक, पिंडारक, करवीर, पुष्पदंष्ट्र, बिल्वक, बिल्वपाण्डुर, मूषकद, शंखशिरा, पूर्णभद्र, हरिद्राक, अपराजित, ज्योतिका, श्रीवाह, कौरव्य, धृतराष्ट्र, पराक्रमी शंखपिंड, विरजा, सुबाहु, वीर्यवान शालिपिंड, हस्तिपिंड, पिथरक, सुमुख, कौन्पाशं, कुठार, कुंजर, प्रभाकर, कुमुद, कुमुदक्ष, तित्तिर, हालिक, महानाग कर्दम, बहुमूलक, कर्क, अकरकर, कुंडोदर और महोदर- ये नाग उत्पन्न हुए। 5-16॥   |   mahabharat अध्याय 1.35: मुख्य-मुख्य नागोंके नाम   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 35: मुख्य-मुख्य नागोंके नाम  »  श्लोक 5-16
 
 
श्लोक  1.35.5-16 
शेष: प्रथमतो जातो वासुकिस्तदनन्तरम्।
ऐरावतस्तक्षकश्च कर्कोटकधनंजयौ॥ ५॥
कालियो मणिनागश्च नागश्चापूरणस्तथा।
नागस्तथा पिञ्जरक एलापत्रोऽथ वामन:॥ ६॥
नीलानीलौ तथा नागौ कल्माषशबलौ तथा।
आर्यकश्चोग्रकश्चैव नाग: कलशपोतक:॥ ७॥
सुमनाख्यो दधिमुखस्तथा विमलपिण्डक:।
आप्त: कर्कोटकश्चैव शङ्खो वालिशिखस्तथा॥ ८॥
निष्टानको हेमगुहो नहुष: पिङ्गलस्तथा।
बाह्यकर्णो हस्तिपदस्तथा मुद्‍गरपिण्डक:॥ ९॥
कम्बलाश्वतरौ चापि नाग: कालीयकस्तथा।
वृत्तसंवर्तकौ नागौ द्वौ च पद्माविति श्रुतौ॥ १०॥
नाग: शङ्खमुखश्चैव तथा कूष्माण्डकोऽपर:।
क्षेमकश्च तथा नागो नाग: पिण्डारकस्तथा॥ ११॥
करवीर: पुष्पदंष्ट्रो बिल्वको बिल्वपाण्डुर:।
मूषकाद: शङ्खशिरा: पूर्णभद्रो हरिद्रक:॥ १२॥
अपराजितो ज्योतिकश्च पन्नग: श्रीवहस्तथा।
कौरव्यो धृतराष्ट्रश्च शङ्खपिण्डश्च वीर्यवान्॥ १३॥
विरजाश्च सुबाहुश्च शालिपिण्डश्च वीर्यवान्।
हस्तिपिण्ड: पिठरक: सुमुख: कौणपाशन:॥ १४॥
कुठर: कुञ्जरश्चैव तथा नाग: प्रभाकर:।
कुमुद: कुमुदाक्षश्च तित्तिरिर्हलिकस्तथा॥ १५॥
कर्दमश्च महानागो नागश्च बहुमूलक:।
कर्कराकर्करौ नागौ कुण्डोदरमहोदरौ॥ १६॥
 
 
अनुवाद
शेषजी सबसे पहले नागों में प्रकट हुए। इसके बाद वासुकी, ऐरावत, तक्षक, कर्कोटक, धनंजय, कालिय, मणिनाग, अपूरण, पिंजरक, एलापत्र, वामन, नील, अनिल, कल्माष, शबल, आर्यक, उग्रक, कलशपोतक, सुमनाख्य, दधिमुख, विमलपिंडक, आप्टा, कर्कोटक (द्वितीय), शंख, वालिशिख, निष्ठानक, हेमगुह, नहुष, पिंगल, बाह्यकर्ण। हस्तिपाद, मुद्गर्पिण्डक, कम्बल, अश्वतर, कालियाक, वृत्त, संवर्तक, पद्म (प्रथम), पद्म (द्वितीय), शंखमुख, कुष्माण्डक, क्षेमक, पिंडारक, करवीर, पुष्पदंष्ट्र, बिल्वक, बिल्वपाण्डुर, मूषकद, शंखशिरा, पूर्णभद्र, हरिद्राक, अपराजित, ज्योतिका, श्रीवाह, कौरव्य, धृतराष्ट्र, पराक्रमी शंखपिंड, विरजा, सुबाहु, वीर्यवान शालिपिंड, हस्तिपिंड, पिथरक, सुमुख, कौन्पाशं, कुठार, कुंजर, प्रभाकर, कुमुद, कुमुदक्ष, तित्तिर, हालिक, महानाग कर्दम, बहुमूलक, कर्क, अकरकर, कुंडोदर और महोदर- ये नाग उत्पन्न हुए। 5-16॥
 
Sheshji was the first to appear among the snakes. Thereafter Vasuki, Airavat, Takshak, Karkotak, Dhananjay, Kaliya, Maninag, Apuran, Pinjarak, Elapatra, Vaman, Neel, Anil, Kalmash, Shabal, Aryak, Ugrak, Kalashpotaka, Sumnakhya, Dadhimukh, Vimalpindak, Apta, Karkotak (second), Shankha, Valishikh, Nishtanak, Hemguh, Nahusha, Pingal, Bahyakarna, Hastipad, Mudgarpindak, Kambal, Ashvatara, Kaliyak, Vritta, Samvartak, Padma (first), Padma (second), Shankhmukh, Kushmandak, Kshemak, Pindarak, Karveer, Pushpadanshtra, Bilvak, Bilvapandur, Mooshkad, Shankhsira, Purnabhadra, Haridrak, Aparajit, Jyotika, Shrivaha, Kauravya, Dhritarashtra, Mighty Shankhapinda, Virja, Subahu, Veeryavan Shalipinda, Hastipinda, Pitharaka, Sumukh, Kaunpashan, Kuthar, Kunjar, Prabhakar, Kumud, Kumudaksha, Tittiri, Halik, Mahanaag Kardam, Bahumulaak, Karkar, Akarkar, Kundodar and Mahodar - these snakes were born. 5-16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)