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सौतिरुवाच
बहुत्वान्नामधेयानि पन्नगानां तपोधन।
न कीर्तयिष्ये सर्वेषां प्राधान्येन तु मे शृणु॥ ४॥
अनुवाद
उग्रश्रवाजी बोले - हे तपस्वी! नागों की संख्या बहुत अधिक है, इसलिए मैं उन सबके नाम नहीं बताऊंगा, किन्तु उनमें जो प्रमुख नाग हैं, उनके नाम आप कृपया सुनिए।
Ugrashravaji said - O ascetic! The number of snakes is very large; therefore I will not tell the names of all of them, but please listen to the names of the main snakes among them.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥