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mahabharat 1.35.19: तपस्वी शौनकजी! यहाँ सर्पों की संख्या हजारों से लेकर लाखों और अरबों तक है। अतः उनकी गणना नहीं की जा सकती॥19॥   |   mahabharat अध्याय 1.35: मुख्य-मुख्य नागोंके नाम   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 35: मुख्य-मुख्य नागोंके नाम  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  1.35.19 
बहूनीह सहस्राणि प्रयुतान्यर्बुदानि च।
अशक्यान्येव संख्यातुं पन्नगानां तपोधन॥ १९॥
 
 
अनुवाद
तपस्वी शौनकजी! यहाँ सर्पों की संख्या हजारों से लेकर लाखों और अरबों तक है। अतः उनकी गणना नहीं की जा सकती॥19॥
 
Ascetic Shaunakji! The number of snakes here ranges from thousands to millions and billions. Hence, they cannot be counted.॥19॥
 
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि आस्तीकपर्वणि सर्पनामकथने पञ्चत्रिंशोऽध्याय:॥ ३५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत आस्तीकपर्वमें सर्पनामकथनविषयक पैंतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३५॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)