Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.34.9-10: गरुड़ बोले - हे स्वर्गराज सहस्राक्ष! मैं किसी कारणवश यह अमृत ले रहा हूँ। मैं इसे किसी को भी पीने को नहीं दूँगा। मैं इसे जहाँ भी रखूँगा, तुम वहाँ से इसे तुरंत ले सकते हो। 9-10. | mahabharat अध्याय 1.34: इन्द्र और गरुडकी मित्रता, गरुडका अमृत लेकर नागोंके पास आना और विनताको दासीभावसे छुड़ाना तथा इन्द्रद्वारा अमृतका अपहरण । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
गरुड़ बोले - हे स्वर्गराज सहस्राक्ष! मैं किसी कारणवश यह अमृत ले रहा हूँ। मैं इसे किसी को भी पीने को नहीं दूँगा। मैं इसे जहाँ भी रखूँगा, तुम वहाँ से इसे तुरंत ले सकते हो। 9-10.
Garuda said - O King of Heaven Sahasraksha! I am taking this nectar for some reason. I will not give it to anyone to drink. Wherever I keep it myself, you can take it immediately from there. 9-10.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥