Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.34.4: हे इन्द्र! मैं पर्वतों, वनों और समुद्रों के जल सहित सम्पूर्ण पृथ्वी को तथा उस पर निवास करने वाले तुम्हें भी अपने एक पंख पर उठाकर बिना किसी प्रयास के उड़ सकता हूँ॥4॥ | mahabharat अध्याय 1.34: इन्द्र और गरुडकी मित्रता, गरुडका अमृत लेकर नागोंके पास आना और विनताको दासीभावसे छुड़ाना तथा इन्द्रद्वारा अमृतका अपहरण । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे इन्द्र! मैं पर्वतों, वनों और समुद्रों के जल सहित सम्पूर्ण पृथ्वी को तथा उस पर निवास करने वाले तुम्हें भी अपने एक पंख पर उठाकर बिना किसी प्रयास के उड़ सकता हूँ॥4॥
Indra! I can lift the entire earth, including the mountains, forests and the waters of the oceans, and even you who live on it, on one of my wings and fly without any effort. ॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥