Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.34.3: परंतु मित्र! तुमने मुझे मित्र मानकर पूछा है, इसलिए मैं तुमसे कह रहा हूँ; क्योंकि बिना कारण आत्मप्रशंसा से भरी हुई बातें नहीं कहनी चाहिए (किन्तु यदि कोई मित्र पूछे तो सच कहने में कोई हानि नहीं है।)॥3॥ | mahabharat अध्याय 1.34: इन्द्र और गरुडकी मित्रता, गरुडका अमृत लेकर नागोंके पास आना और विनताको दासीभावसे छुड़ाना तथा इन्द्रद्वारा अमृतका अपहरण । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
परंतु मित्र! तुमने मुझे मित्र मानकर पूछा है, इसलिए मैं तुमसे कह रहा हूँ; क्योंकि बिना कारण आत्मप्रशंसा से भरी हुई बातें नहीं कहनी चाहिए (किन्तु यदि कोई मित्र पूछे तो सच कहने में कोई हानि नहीं है।)॥3॥
But friend! You have asked me considering me a friend, that is why I am telling you; because one should not say things full of self-praise without any reason (but there is no harm in telling the truth if a friend asks.)॥ 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥