Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.34.26: जो मनुष्य पक्षीराज महात्मा गरुड़ के गुणों का गान करते हुए श्रेष्ठ द्विजों की उत्तम सभा में इस कथा को सदैव पढ़ता या सुनता है, वह पुण्य प्राप्त करके अवश्य ही स्वर्ग को जाता है॥26॥   |   mahabharat अध्याय 1.34: इन्द्र और गरुडकी मित्रता, गरुडका अमृत लेकर नागोंके पास आना और विनताको दासीभावसे छुड़ाना तथा इन्द्रद्वारा अमृतका अपहरण   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 34: इन्द्र और गरुडकी मित्रता, गरुडका अमृत लेकर नागोंके पास आना और विनताको दासीभावसे छुड़ाना तथा इन्द्रद्वारा अमृतका अपहरण  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  1.34.26 
इमां कथां य: शृणुयान्नर: सदा
पठेत वा द्विजगणमुख्यसंसदि।
असंशयं त्रिदिवमियात् स पुण्यभाक्
महात्मन: पतगपते: प्रकीर्तनात्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य पक्षीराज महात्मा गरुड़ के गुणों का गान करते हुए श्रेष्ठ द्विजों की उत्तम सभा में इस कथा को सदैव पढ़ता या सुनता है, वह पुण्य प्राप्त करके अवश्य ही स्वर्ग को जाता है॥26॥
 
The person who always reads or listens to this story in the best gathering of the best Dwijos, by singing the virtues of Mahatma Garuda, the king of birds, he will definitely go to heaven after receiving good deeds. 26॥
 
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि आस्तीकपर्वणि सौपर्णे चतुस्त्रिंशोऽध्याय:॥ ३४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत आस्तीकपर्वमें गरुडचरित्रविषयक चौंतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३४॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)