Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.34.25: उस दिन से सुन्दर पंखों वाला गरुड़ अत्यन्त प्रसन्न होकर अपनी माता के साथ रहने लगा और इच्छानुसार वन में विचरण करने लगा। वह सर्पों का भक्षण करके माता विनता को आनन्द देने लगा और पक्षियों द्वारा सम्मानित होकर अपना उज्ज्वल यश चारों ओर फैलाने लगा॥ 25॥ | mahabharat अध्याय 1.34: इन्द्र और गरुडकी मित्रता, गरुडका अमृत लेकर नागोंके पास आना और विनताको दासीभावसे छुड़ाना तथा इन्द्रद्वारा अमृतका अपहरण । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उस दिन से सुन्दर पंखों वाला गरुड़ अत्यन्त प्रसन्न होकर अपनी माता के साथ रहने लगा और इच्छानुसार वन में विचरण करने लगा। वह सर्पों का भक्षण करके माता विनता को आनन्द देने लगा और पक्षियों द्वारा सम्मानित होकर अपना उज्ज्वल यश चारों ओर फैलाने लगा॥ 25॥
From that day onwards, the Garuda with beautiful wings became very happy and started staying with his mother and roaming around in the forest as per his wish. He started giving joy to mother Vinata by eating snakes and spreading his bright fame all around by being respected by the birds.॥ 25॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥