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mahabharat 1.34.20: तब सर्पों ने 'तथास्तु' कहकर स्नान करने चले गए। उधर इन्द्र अमृत लेकर स्वर्ग को चले गए ॥20॥   |   mahabharat अध्याय 1.34: इन्द्र और गरुडकी मित्रता, गरुडका अमृत लेकर नागोंके पास आना और विनताको दासीभावसे छुड़ाना तथा इन्द्रद्वारा अमृतका अपहरण   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 34: इन्द्र और गरुडकी मित्रता, गरुडका अमृत लेकर नागोंके पास आना और विनताको दासीभावसे छुड़ाना तथा इन्द्रद्वारा अमृतका अपहरण  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  1.34.20 
तत: स्नातुं गता: सर्पा: प्रत्युक्त्वा तं तथेत्युत।
शक्रोऽप्यमृतमाक्षिप्य जगाम त्रिदिवं पुन:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
तब सर्पों ने 'तथास्तु' कहकर स्नान करने चले गए। उधर इन्द्र अमृत लेकर स्वर्ग को चले गए ॥20॥
 
Then the snakes said 'Amen' and went for bath. Meanwhile, Indra took the nectar and went back to heaven. 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)