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mahabharat 1.34.14: तब दैत्य शत्रु इन्द्र 'तथास्तु' कहकर योगीश्वर देवाधिदेव भगवान श्रीहरि के पास गये। 14॥   |   mahabharat अध्याय 1.34: इन्द्र और गरुडकी मित्रता, गरुडका अमृत लेकर नागोंके पास आना और विनताको दासीभावसे छुड़ाना तथा इन्द्रद्वारा अमृतका अपहरण   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 34: इन्द्र और गरुडकी मित्रता, गरुडका अमृत लेकर नागोंके पास आना और विनताको दासीभावसे छुड़ाना तथा इन्द्रद्वारा अमृतका अपहरण  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  1.34.14 
तथेत्युक्त्वान्वगच्छत् तं ततो दानवसूदन:।
देवदेवं महात्मानं योगिनामीश्वरं हरिम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
तब दैत्य शत्रु इन्द्र 'तथास्तु' कहकर योगीश्वर देवाधिदेव भगवान श्रीहरि के पास गये। 14॥
 
Then the demon enemy Indra went to Shri Hari, the Yogishwar Devadhidev God, saying 'Tathaastu'. 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)